पृथ्वीराज चौहान ।Story। |।VJ।|

पृथ्वीराज चौहान

(चंद्रबदाई द्वारा लिखित ग्रंथ "पृथ्वीराजरासो" के अनुसार)

(पृथ्वीराज चौहान)

जब मुहम्मद गौरी जो कि अफगान से था भारत पर अधिकार करना चाहता था और उस समय भारत पर राजपूतो का राज था
और गौरी को अधिकार पाने के लिए राजपूतो को हराना था।

जब गौरी ने भारत पर आक्रमण किया तो सबसे पहले उसने अपना अभियान अजमेर के खिलाफ चलाया
अजमेर में चौहान वंश के प्रतापी शासक पृथ्वीराज चौहान तृतीय का राज था

जब गौरी ने अजमेर पर आक्रमण किया तो पृथ्वीराज चौहान और गौरी के मध्य तराइन में युद्ध हुआ जिसे तराइन का प्रथम युद्ध(1191) कहा गया
इसमे पृथ्वीराज की वीरता और शौर्य के कारण गौरी को हार का सामना करना पड़ा।

पृथ्वीराज ने गौरी को जीवनदान दिया। गौरी वापस अफगान गया और उसने पुनः सेना इकठ्ठा की ओर वापस भारत पर हमला कर दिया।
पृथ्वीराज आक्रमण को तैयार नही थे इसलिए तराईन के द्वितीय युद्व(1192) में उन्हें हार का सामना करना पड़ा और भारत पर अफगान के शहाब-उद-दीन मुहम्मद गौरी(गौर वंश) का शासन स्थापित हो गया।
(शहाब-उद-दीन मुहम्मद गौरी)

गौरी पृथ्वीराज को गज़नी ले गया जंहा पृथ्वीराज को कैद कर लिया गया।
शाही दरबार मे पेशी के दौरान पृथ्वीराज की गुस्ताखी पर गौरी ने पृथ्वीराज की आंखे फुड़वा दी।

अजमेर से पृथ्वीराज का मित्र और लेखक चंद्रबदाई गज़नी पहुच गया। वंहा पहुच चंद्रबदाई ने सुल्तान गौरी के कानों तक बात पहुचाई की पृथ्वीराज तीर बाण चलाने में माहिर है।

तो गौरी ने एक खेल का आयोजन किया जिसमे पृथ्वीराज अपना खेल दिखाएंगे
मैदान में तैयारियां की गई
सुल्तान आये और ऊंचे तख्त पर बैठ गए तथा खेल शुरू करने का आदेश दिया
( चंद्रबदाई )

पृथ्वीराज को लाया गया तथा धनुष ओर बाण दिए गए। चंद्रबदाई जानते थे कि पृथ्वीराज को शब्दभेदी बाण चलाना आता है।
चंद्रबदाई पृथ्वीराज के बगल में जाकर खड़े हो गए और जैसे ही सुल्तान ने एक ओर बार खेल शुरू करने का आदेश दिया

तो चंद्रबदाई ने पृथ्वीराज को एक दोहा सुनाया
"चार बांस चौबीस गज़ अंगुल अष्ट प्रमाण,
 ता ऊँचे सुल्तान है, मत चूके चौहान ।"

यह सुनते ही पृथ्वीराज ने बाण छोड़ा जो कि सीधा गौरी के सिने में जा लगा और सुल्तान की मृत्यु हो गयी।
चंद्रबदाई ने अपनी कटार निकाली और पहले पृथ्वीराज को और फिर खुद को मार दिया।

Vijay Merotha

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