Posts

वीर जैता और कूपा ।Story। |।VJ।|

Image
जैता और कूपा (वीर कूपा जी राठौड़) जोधपुर पर राठौड़ वंश के मालदेव राठौर का शासन था। मालदेव एक बहादुर राजा था वह हर युद्ध मे विजयी होता था और उसकी हर विजय का कारण होते थे मालदेव के वीर सेनापति जैता और कूपा, दोनों बहुत ही बहादुर और निडर सेनापति थे। (वीर जैता जी राठौर) मालदेव के समकालीन दिल्ली पर मुग़ल शासक हुमायु का राज था। हुमायु बाबर का पुत्र था। बाबर की सेना में फरीद खान नाम का एक सिपाही था जो कि अफगानी पठान था। बाबर ने उसे सेनापति बना बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया था। बाबर के बाद जब हुमायु ने राज संभाला तो फरीद खान ने हुमायु से दिल्ली की बादशाहत छोड़ने को कहा हुमायु ने मना कर दिया तो फरीद ने दिल्ली पर आक्रमण करने के लिए कूच किया। क्योकि फरीद खान पहले खुद मुग़ल सेना में था इसलिए वो पहले ही मुग़ल सेना की हर तैयारी ,हथियार और रणनीति से वाकिफ था इसलिए उसे हमले की तैयारी में ज्यादा समय नही लगा। (मिर्ज़ा नासिर उद-द्दीन बैग मुहम्मद खान हुमायु) जब हुमायु को पता चला कि फरीद खान आक्रमण कर रहा है तो हुमायु ने युद्ध के लिए जोधपुर के मालदेव राठौड़ को आमंत्रित किया मालदेव राठौड़ न...

हाड़ी रानी ।Story। |।VJ।|

Image
हाड़ी रानी (सल्जत कँवर/ हाड़ी रानी) मेवाड़ के शासक महाराणा राजसिंह के समय दिल्ली पर मुग़ल शासक औरंगज़ेब का राज था। राजसिंह और औरंगज़ेब के बीच कई मतभेद थे। एक बार औरंगज़ेब किशनगढ़ की राजकुमारी चारुमती को देख उसपर मोहित हो गया। चारुमती किशनगढ़ के राजा रूपसिंह की पुत्री तथा मानसिंह की बहिन थी। औरंगज़ेब ने मानसिंह को दिल्ली बुलाया और उसके सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। मानसिंह के मना करने पर औरंगज़ेब ने धमकाया। मानसिंह ने जब वापस आकर पिता को यह बात बताई तो राजा रूपसिंह का चेहरा पीला पड़ गया, चारुमती सुनकर रोने लगी और इनकार कर दिया। (महाराणा राजसिंह) जब औरंगज़ेब को पता चला कि चारुमती ने विवाह से मना कर दिया तो औरंगज़ेब खुद किशनगढ़ पहुँच गया, वहाँ जाकर रूपसिंह के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। जब रूपसिंह ने कहा कि हम राजपूत मुग़लो से विवाह संबंध नही बनाते तो औरंगज़ेब ने अकबर और जहाँगीर का उदाहरण दिया जिन्होंने राजपूतो के साथ विवाह संबंध बनाए थे। मज़बूरन रूपसिंह को मानना पड़ा और औरंगज़ेब तथा चारुमती की सगाई की गई। जब बात राजसिंह के कानो में पड़ी तो राजसिंह भी किशनगढ़ जा पहुँचे और राजा रूपसिंह ...

पृथ्वीराज चौहान ।Story। |।VJ।|

Image
पृथ्वीराज चौहान (चंद्रबदाई द्वारा लिखित ग्रंथ "पृथ्वीराजरासो" के अनुसार) (पृथ्वीराज चौहान) जब मुहम्मद गौरी जो कि अफगान से था भारत पर अधिकार करना चाहता था और उस समय भारत पर राजपूतो का राज था और गौरी को अधिकार पाने के लिए राजपूतो को हराना था। जब गौरी ने भारत पर आक्रमण किया तो सबसे पहले उसने अपना अभियान अजमेर के खिलाफ चलाया अजमेर में चौहान वंश के प्रतापी शासक पृथ्वीराज चौहान तृतीय का राज था जब गौरी ने अजमेर पर आक्रमण किया तो पृथ्वीराज चौहान और गौरी के मध्य तराइन में युद्ध हुआ जिसे तराइन का प्रथम युद्ध(1191) कहा गया इसमे पृथ्वीराज की वीरता और शौर्य के कारण गौरी को हार का सामना करना पड़ा। पृथ्वीराज ने गौरी को जीवनदान दिया। गौरी वापस अफगान गया और उसने पुनः सेना इकठ्ठा की ओर वापस भारत पर हमला कर दिया। पृथ्वीराज आक्रमण को तैयार नही थे इसलिए तराईन के द्वितीय युद्व(1192) में उन्हें हार का सामना करना पड़ा और भारत पर अफगान के शहाब-उद-दीन मुहम्मद गौरी(गौर वंश) का शासन स्थापित हो गया। (शहाब-उद-दीन मुहम्मद गौरी) गौरी पृथ्वीराज को गज़नी ले गया जंहा पृथ्व...